Love Stream 7 : तलाश | Run Run Run

In this Poem, core thought is seeking and running for love… this is inseparable part of any relationship. I have used single world technique, hope you would like it.

नटखट
शफ़क़त
शशशशश…
बोलो मत
ख़्वाब नूर
लाए हैं
आंखों को
खोलो मत
आगोश को
होश नहीं
खुद को अब
रोको मत
रस बहे
होंठ-होंठ
रग-रग
सख़्त-सख़्त
घूप छांव
खेलता
तेरा अक्स
मस्त मस्त
उस दुनिया में
तुझको
ढूंढता मैं
हर वक़्त


© Siddharth Tripathi  *SidTree |  www.KavioniPad.com, 2016.

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