Miracles of Cold… ठंड के करिश्मे

Core Thought : Weather improves your vision.. sometimes !!
मूल विचार : कई बार मौसम हमारी आंखें खोल देता है


वो बोलती है तो
धुएं से कुछ लिखती जाती है
सब ठंड के करिश्मे हैं
जो अपने आप होते हैं
कोई रोक नहीं सका इनको

जाने कैसे उसके पैर
गले को छू लेते हैं
किसी ‘टैलेंट शो’ में ‘हंट’ होना था
फुटपाथ पर हलाल हो रहा है
सब ठंड के करिश्मे हैं
जो अपने आप होते हैं
कोई रोक नहीं सका इनको

बड़े शहर के पंजे से बाहर जाओ
तारे ज़्यादा दिखते हैं
और सर्द सच्चाइयां भी
शर्मिंदा न हों
सब ठंड के करिश्मे हैं
जो अपने आप होते हैं
कोई रोक नहीं सका इनको

website miracles of cold final

International Version

When She speaks
her words flow in the air
and temprature converts those words
into small pieces of a giant Cloud
It’s miracle of cold… See.. feel… hold

See that boy on the footpath
Trying to cover his stomach, with his legs
Hunger made him stretch like an artist
Ironical but…
It’s a miracle of cold… See.. feel.. Hold

Take a break
Come out of your chaotic world
You would observe a lot of stars
and truth, that is dying by your own deeds
but don’t be ashamed
It’s a miracle of cold… See.. feel.. hold


© Siddharth Tripathi ✍️ SidTree

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