Yawns compressed to Tear Rocks : नींद वाले आंसुओं की चट्टानें

Core Thought is : When I compress my yawns, They are converted into tears and like a scientific process, Money is released.

आजकल अगर घर या दफ़्तर की
खिड़की खुली रह जाए
तो नींद बिना पूछे अंदर घुस आती है
और तकाज़ा करती है
“लाओ.. कुछ पल, कुछ मिनट या कुछ घंटे मेरे हवाले कर दो”

लेकिन मैं पक्का व्यापारी हो चुका हूं
पूरी ताकत से अपनी जम्हाइयां दबाता हूं
फिर कुछ आंसू उसकी हथेली पर रख देता हूं
और नींद…
रख देती है सिक्कों का ढेर मेरी हथेली पर
इतने सारे सिक्के, जो मेरी हथेली में नहीं समाते
ऐसा लगता है चारों तरफ यही व्यापार चल रहा है
हम सब नींद को दबाकर आंसू बना रहे हैं,
सिक्के कमा रहे हैं
लेकिन खारे पानी जैसी इस नींद की परतें
एक दिन चट्टान बन जाएँगी

वो चट्टान जो तकिये के नीचे से चुभती है

International Version 

When I compress my yawns
they are converted into tears
and like a scientific process
money is released

but in this course
tears flow down
everyday
beneath the pillow

One day layers of these salty tears
would form a rock
and that rock would pinch through the pillow

© Siddharth Tripathi and www.KavioniPad.com, 2015

One Reply to “Yawns compressed to Tear Rocks : नींद वाले आंसुओं की चट्टानें”

  1. very nice.. keep it up with no end..👍

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