Villages of India : मेरा गांव, मेरा देश

Wanted to share a Factsheet of Villages of India, Have a look
हमारे देश में 6 लाख 40 हज़ार 867 गांव हैं.. और देश की करीब 70 फीसदी जनसंख्य़ा गांव में रहती है और देश में सिर्फ 15 हज़ार 870 शहर हैं..
लेकिन दुख की बात ये है कि गांव की ज़मीन में आज भी चमकीले सपने नहीं उगते… लोगों को सपने उगाने के लिए कॉन्क्रीट के शहर में आना पड़ता है… शहरों के सपनीले आसमान के सामने गांव का आसमान बहुत खाली खाली लगता है… यही वजह है कि अपने बेहतर भविष्य की तलाश में लोग गांवों से और अपनी जड़ों से दूर भागते हैं… अब तक हिंदुस्तान में यही होता आया है..
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हमारे देश की 70 फीसदी आबादी गांवों में बसती है…लेकिन इतनी बड़ी आबादी के लिए देश में सिर्फ एक तिहाई Hospital Beds ही उपलब्ध हैं
ग्रामीण इलाकों में इलाज के लिए 32 फीसदी लोगों को 5 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय करनी पड़ती है
ग्रामीण भारत के 14 फीसदी प्राइमरी स्कूलों में सिर्फ एक टीचर होता है
यही वजह है कि ग्रामीण भारत में साक्षरता दर 67.8 फीसदी है जबकि शहरी भारत में ये आंकड़ा तकरीबन 85 फीसदी है
रंगराजन कमेटी की रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीण भारत में रहने वाले साढ़े 26 करोड़ लोग गरीब हैं
जबकि शहरों में गरीबों की संख्या करीब 10 करोड़ है
एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण भारत में प्रति परिवार बिजली की औसत खपत 8 यूनिट प्रतिमाह है
जबकि शहरी भारत में प्रति परिवार बिजली की औसत खपत 24 यूनिट प्रतिमाह है
ऐसा इसलिए है क्योंकि आज भी 43 फीसदी गांवों में बिजली नहीं पहुंची है
जबकि शहरी भारत में 93 फीसदी घरों में बिजली का कनेक्शन है
National Transport Policy Committee के मुताबिक देश के 55 फीसदी गांव ही सड़कों से जुड़े हुए हैं
गांव और शहर के बीच वैसे तो आपको सैकड़ों अंतर मिल जाएंगे.. लेकिन सबसे बड़ा अंतर यही है कि गांव का आसमान स्वच्छ होता है… वहां तारे ज़्यादा दिखते हैं लेकिन गांव के आसमान में सपनों की कमी होती है.. और एक खालीपन होता है.. क्योंकि हमारे देश के 6 लाख से ज़्यादा गांवों में से कुछ को ही विकास का विटामिन मिल पाता है.. बाकी ज़्यादातर गांव हमारी नीतियों के खाली प्लेटफॉर्म पर विकास की ट्रेन का इंतज़ार करते रहते हैं… शहरों के धुएं से भरे आसमान में भी सपने दिख जाते हैं, और शहरों का कॉन्क्रीट गांव की उपजाऊ ज़मीन से जीत जाता है.. शहर और गांव के इस फर्क ने हमारे देश की उड़ान को रोका है… और शहरों में सपने ढूंढने वाली भीड़ बढ़ाई है। भारत हो या दुनिया हर जगह Mega Cities की संख्या बढ़ी है और उनमें भीड़ बढ़ी है। ज़ाहिर है ये हर विकासशील देश का रोग है जो इलाज की मांग करता है
– Siddharth

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