Flying : उड़ान

This Poem Welcomes New Year with a new thought on flying. Flying is simply rising above all complications.

As You raise height of your thoughts, everything just shrinks into one dot

So, Try to Fly….& Keep Flying.

In Picture – Mumbai from a flight, Maximum City Zoomed Out to a Point… and that exactly is the point where this poem ever-glows

mumbai trip 29, 30 Jan 2011

आज कह दो ज़माने से
ज़मीन पर पैर रखने के लिए नहीं उड़ा था मैं..

ज़मीन के टुकड़े पर
पैर के अंगूठे की वो आखिरी छुअन याद है मुझे

उस पल से ज़मीन पर लिखे
बड़े-बड़े नाम, जीवन के दाम
धीरे धीरे छोटे होते गए

अपनी फैली हुई दुनिया को
एक बिंदु पर सिमटते हुए देखना
हैरान कर देता है मुझे

ये उड़ान मुझे ज़मीन पर उतरने नहीं देती

© Siddharth Tripathi

1 Comment

  1. ज़माने को ओकात बता देना
    इतिहास को दर्पण दिखा देना
    हमारे होंंसले टूटे ज़रूर थे
    लेकिन हम से छूटे नहीं थे

    आप की पंक्ति
    ज़मीन पर पैर रखने के लिए नहीं उड़ा था मैं.

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