Boiling Ocean of Mumbai City…. उबलता समंदर

Taken from bilingual poem collection ‘Poetic Buddha’ by Siddharth

Poem in Hindi
जब दो जोड़ा आंखें.. सपने बुन रही थीं..
समंदर चुप था
‘चिल्लर’ की भूख,
मवाली का दबदबा
दारू की मस्ती
रिश्वतखोर ख़ाकी
बेईमान टोपी
सब देखता था समंदर
पर चुप रहता था

लेकिन बीती रात
समंदर ने सुनी
एक शहर की ख़ामोशी
देखी कैमरों की भीड़
चिकने चुपड़े लोग
सिर के बजाय मुंह ढकती टोपियां
और देखा
जलता हुआ एक सुर्ख फूल
वहीं किनारे पर
गोलियों से उधड़े मन
बयान दे रहे थे
और
चुपचाप सबकुछ सुनने वाला
समंदर उबल रहा था

© Siddharth Tripathi and http://www.KavioniPad.com, 2011. Unauthorized use and/or duplication of this material without express and written permission from this blog’s author and/or owner is strictly prohibited. Excerpts and links may be used, provided that full and clear credit is given to Siddharth Tripathi and http://www.kavionipad.com with appropriate and specific direction to the original content.

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