🌈 A Kavi on iPad creates 'Nirvana of Infotainment'

    अ-सामाजिक कविताएँ : Anti Social Poems

    सोशल मीडिया के इस दौर में मानव स्वभाव को रेखांकित करते हुए, मैंने 8 कविताएँ लिखी हैं। ये एक श्रृंखला है जिसका शीर्षक है “अ-सामाजिक कविताएँ”…

    Fake Account : कौन हो तुम ?

    सुबह सुबह अपने चेहरे पर रंग लगाकर निकलते हैं इन बच्चों की असली शक्ल देखी है किसी ने ? ज़माने को बेचने चले थे रक्त स्नान…

    Likes & Retweets : इंतज़ार

    तस्वीरों में शोक और हर्ष स्थिर हो जाता है संवेदनाएँ ठिठक कर खड़ी हो जाती हैं और थोड़ी ज़्यादा साफ़ दिखती हैं जैसे किसी प्रागैतिहासिक रत्न…

    Unfriend : अ-मित्र

    मेरे अंतर्मन में आप एक जल चुकी मोमबत्ती की तरह हैं.. जिसकी रोशनी और जिसका मोम.. विलीन हो चुका है और धागे के जलने की ज़रा…

    Direct Message vs मुलाक़ात

    अ-सामाजिक कविताओं की सीरीज़ में तीसरी कविता, कम से कम सात कविताएँ हैं। उम्मीद है कि आपको अच्छी लगेंगी। सोशल मीडिया के इस दौर में मुलाक़ात…